मै 'स्पिरिट' लिखुंगा, तुम मजबुरी समझ लेना

Guruprasad Jadhav Poem on Mumbai Stampede

पत्रकार म्हणून एक घुसमट असते, जी बातमीच्या मथळ्यात कधीच झळकत नाही. तिला मोकळी वाट करून देण्याचा हा प्रयत्न. ‘हा’ खून आहे हे कळत असतानाही ज्यांना मृत्यू म्हणावं लागलं, अशा पत्रकारांची भावना व्यक्त करणारी ही कविता…

मै ‘स्पिरिट’ लिखुंगा
तुम मजबुरी समझ लेना

मै हादसा लिखुंगा
तुम खून समझ लेना

मै नया दिन लिखुंगा
तुम काली रात समझ लेना

मै वाकिया लिखुंगा
तुम हालात समझ लेना

मै मुआवजा लिखुंगा
तुम जुर्माना समझ लेना

मै पौधा लिखुंगा
तुम जंगल समझ लेना

मै भगदड लिखुंगा
तुम दंगल समझ लेना

मै यकिनन लिखुंगा
तुम शक समझ लेना

मै नेता लिखुंगा
तुम दर्शक समझ लेना

मै सच्चा लिखुंगा
तुम लायर समझ लेना

मै निडर लिखुंगा
तुम कायर समझ लेना

मै सन्नाटा लिखुंगा
तुम शोर समझ लेना

मै कुछ और लिखुंगा
तुम कुछ और समज लेना

  • गुरुप्रसाद जाधव

22050284_1672406536165898_6333445486753917928_n

News शी संबंधित सर्व बातम्यांसाठी आम्हाला फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब वर फॉलो करा. तसंच आमचं Marathi News App डाऊनलोड करा!
Web Title:Guruprasad Jadhav Poem on Mumbai Stampede
Find Marathi News from Mumbai, Pune, Nashik, Politics, Technology, Sports, Bollywood, Agriculture. याशिवाय आणखी काही रंजक बातम्या
First Published: